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विंध्याचल

तीर्थ एवं स्थान

अन्य नाम: विंध्याचल, विंध्यवासिनी

उत्तर प्रदेशशक्तिपीठगंगा

विंध्याचल उत्तर प्रदेश के मिर्ज़ापुर ज़िले में, गंगा नदी के तट पर, विंध्य पर्वत के निकट स्थित है। यहाँ माँ विंध्यवासिनी का प्रसिद्ध मंदिर है; माना जाता है कि यह वह स्थान है जहाँ देवी ने स्वयं निवास चुना।

कथा: महाभारत के विराट पर्व में धर्मराज युधिष्ठिर देवी की स्तुति करते हुए उन्हें विंध्य पर्वत के शिखर पर वास करने वाली कहते हैं। भागवत के अनुसार स्वायंभुव मनु ने देवी की प्रतिमा बनाकर सौ वर्ष तक तप किया; प्रसन्न देवी ने वर दिया और विंध्याचल में वास किया। पद्म पुराण में भी विंध्यवासिनी का उल्लेख मिलता है।

महात्व: विंध्याचल में तीन देवियों — विंध्यवासिनी, अष्टभुजा और काली (कालीखोह) — के दर्शन से 'त्रिकोण परिक्रमा' पूर्ण होती है। नवरात्रि और काजरी (विंध्यवासिनी जयंती) पर विशेष उत्सव होते हैं। यह प्रयागराज और काशी के बीच स्थित एक प्रमुख शक्तिपीठ है।

प्रसिद्ध कथन

हे माता! तुम सदा विंध्य पर्वत के शिखर पर विराजती हो। (भावानुवाद — महाभारत, विराट पर्व में युधिष्ठिर की स्तुति)

संबंधित

दुर्गाशक्तिपीठयुधिष्ठिरशक्तिप्रयागराज

स्रोत: महाभारत (विराट पर्व); पद्म पुराण; देवी भागवत