त्र्यंबकेश्वर
तीर्थ एवं स्थान
अन्य नाम: त्र्यंबकेश्वर, त्रिंबक
त्र्यंबकेश्वर महाराष्ट्र के नासिक ज़िले में, नासिक से लगभग 28 किमी दूर, ब्रह्मगिरि पर्वत की तलहटी में स्थित है। यहाँ से गोदावरी (दक्षिण की गंगा) का उद्गम माना जाता है। यह बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक है।
विशेषता: यहाँ का ज्योतिर्लिंग त्रिमुखी है — ब्रह्मा, विष्णु और महेश — तीनों रूपों में। तीन पहाड़ — ब्रह्मगिरि, नीलगिरि और कालगिरि — इसे घेरे हुए हैं। मंदिर परिसर में 'कुशावर्त कुंड' है, जिसे गोदावरी का उद्गम-कुंड माना जाता है।
कथा: कथा है कि गौतम ऋषि और उनकी पत्नी अहल्या ब्रह्मगिरि पर रहते थे। गौ-हत्या के पाप से मुक्ति के लिए गौतम ऋषि ने शिव की तपस्या की; शिव ने गंगा को गोदावरी रूप में यहाँ प्रवाहित किया। तभी से गोदावरी का यह उद्गम पवित्र माना जाता है।
महात्व: वर्तमान मंदिर पेशवा बालाजी बाजीराव ने औरंगजेब द्वारा ध्वंस के बाद बनवाया। श्रावण में ब्रह्मगिरि परिक्रमा (लगभग 40 किमी) का विशेष महत्व है। नासिक-त्र्यंबकेश्वर में सिंहस्थ कुंभ भी लगता है।
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स्रोत: स्कन्द पुराण; शिव पुराण