प्रयागराज
तीर्थ एवं स्थान
अन्य नाम: प्रयाग, इलाहाबाद, तीर्थराज प्रयाग, संगम
प्रयागराज उत्तर प्रदेश में गंगा और यमुना नदियों के संगम पर बसा है; परंपरा इसमें अदृश्य सरस्वती को भी जोड़ती है, इसीलिए यह 'त्रिवेणी संगम' कहलाता है।
प्रयाग को 'तीर्थराज' कहा गया है। मान्यता है कि प्रजापति ब्रह्मा ने यहाँ यज्ञ किया, इसी से 'प्रयाग' नाम पड़ा। संगम पर स्नान करना समस्त तीर्थों के फल के बराबर माना जाता है। यहीं कुम्भ, अर्धकुम्भ तथा माघ मेले लगते हैं, जो मकर संक्रांति और माघ पूर्णिमा के आसपास होते हैं।
यहाँ का अक्षयवट (अमर वृक्ष) और पुराणों में वर्णित हंस-तीर्थ आदि प्रमुख स्थान हैं। माघ मास में कल्पवास तथा संगम-स्नान का विशेष महत्व है। पुराणों में इसे पापनाशक और मोक्षप्रद तीर्थ कहा गया है।
प्रसिद्ध कथन
'प्रयागः पापनाशनः' — प्रयाग पापों का नाश करने वाला है। (भावानुवाद)
'तीर्थराज प्रयाग' — समस्त तीर्थों में प्रयाग राजा के समान है। (भावानुवाद)
संबंधित
स्रोत: पद्म पुराण, मत्स्य पुराण (प्रयाग महात्म्य)