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तारा

रामायण एवं रामचरितमानस

रामायणवानरकिष्किंधा

तारा किष्किंधा की वानरी, वाली की पत्नी और अंगद की माता थीं। वे बुद्धिमती और दूरदर्शी थीं; वाली के अनेक निर्णयों में उनकी सलाह रहती थी।

वाली की मृत्यु पर तारा ने हृदयविदारक विलाप किया और राम-लक्ष्मण के पराक्रम को पहचाना। वाली के बाद सुग्रीव ने उन्हें अपनी पत्नी बनाया।

जब सुग्रीव ने अंगद को लंका में शांति-प्रस्ताव के लिए भेजा, तब तारा ने अंगद को समझाया कि राम से बैर न करे और बुद्धि से काम ले। लंका युद्ध में तारा ने वानर-सेना का नेतृत्व भी किया और राक्षस कुंभहनु का वध किया।

नाते-रिश्ते

  • पति: वाली
  • पुत्र: अंगद
  • पति (बाद में): सुग्रीव

प्रसिद्ध कथन

तारा ने अंगद को समझाया — "जिस राम के बाणों से बाली वीरगति को प्राप्त हुए, उससे बैर करना तेरे कल्याणकारी नहीं; बुद्धि से काम ले।" (भावानुवाद)

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स्रोत: वाल्मीकि रामायण – किष्किन्धाकाण्ड / युद्धकाण्ड