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अंगद

रामायण एवं रामचरितमानस

अन्य नाम: अंगद

किष्किंधारामदूतवानर

अंगद के जन्म के विषय में दो परंपराएँ हैं — वाल्मीकि रामायण में उन्हें बालि और तारा का पुत्र कहा गया है, जबकि रामचरितमानस में उन्हें सुग्रीव का पुत्र कहा गया है। दोनों पाठों में वे किष्किंधा के बलवान और वाक्पटु वानर हैं।

राम ने उन्हें रावण के दरबार में शांति-दूत बनाकर भेजा। वहाँ उसने रावण के सिंहासन के निकट पैर रखकर चुनौती दी — प्रसिद्ध है कि रावण के दरबार में कोई भी उसका पैर हिला न सका ('अंगद का पैर')।

उसने रावण को राम की शक्ति और धर्म की श्रेष्ठता समझाई, परंतु रावण अड़ा रहा। युद्ध में उसने महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई।

नाते-रिश्ते

  • पिता: सुग्रीव (परंपरा-भेद: बालि)
  • माता: तारा

प्रसिद्ध कथन

रावण के दरबार में: "जो मेरा पैर उठा दे, वही राम का सामना कर पाएगा।" (भावानुवाद; प्रसिद्ध 'अंगद-दूत' प्रसंग)

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सुग्रीवश्रीरामरावणहनुमानजांबवान

स्रोत: वाल्मीकि रामायण – युद्धकाण्ड; रामचरितमानस – लंकाकाण्ड