वैकुंठ
शब्दावली
अन्य नाम: वैकुण्ठलोक, विष्णुलोक
वैकुंठ भगवान विष्णु का परम धाम है, जहाँ लक्ष्मी के साथ नारायण विराजमान रहते हैं। "विकुण्ठ" का अर्थ है कुण्ठा अथवा दुःख से रहित। यह लोक जरा, मृत्यु, शोक और भय से मुक्त है और इसकी भूमि दिव्य मानी जाती है।
वैकुंठ सूर्य, चन्द्र अथवा अग्नि से प्रकाशित नहीं होता, बल्कि स्वयं प्रकाशमान है। गीता में श्रीकृष्ण कहते हैं कि उनका वह परम धाम सूर्य, चन्द्र और अग्नि से प्रकाशित नहीं होता और जो वहाँ पहुँच जाते हैं, वे फिर लौटकर नहीं आते।
भागवत के अनुसार वैकुंठलोक भक्ति से ही प्राप्य है, केवल ज्ञान या तप से नहीं। वहाँ पहुँचने वाला जीव जन्म-मरण के चक्र से मुक्त हो जाता है और भगवान के सान्निध्य का सुख प्राप्त करता है।
प्रसिद्ध कथन
न तद्भासयते सूर्यो न शशाङ्को न पावकः । यद्गत्वा न निवर्तन्ते तद्धाम परमं मम (भगवद्गीता 15.6) — भावानुवाद: उस परम धाम को न सूर्य, न चन्द्र और न अग्नि प्रकाशित करते हैं; वहाँ जाकर लौटना नहीं होता।
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स्रोत: भगवद्गीता