गोलोक
शब्दावली
अन्य नाम: गोलोक वृन्दावन, कृष्णलोक
गोलोक (गोलोक वृन्दावन) श्रीकृष्ण का परम धाम है। वैष्णव परम्परा, विशेषकर गौड़ीय सम्प्रदाय, इसे सबसे ऊँचा और नित्य लोक मानती है। यहाँ श्रीकृष्ण गौओं, गोपों और गोपियों से घिरे रहते हैं और रास-लीला का आयोजन होता है।
ब्रह्मवैवर्त पुराण के अनुसार गोलोक तीनों लोकों के ऊपर स्थित है, जो नित्य और रत्नमयी भूमि वाला है। वह आधि (मानसिक रोग), व्याधि (शारीरिक रोग), मृत्यु, शोक और भय से रहित बताया गया है। प्रलयकाल में भी यह अविनाशी रहता है, जबकि सृष्टिकाल में वहाँ गोप-गोपियों का वास होता है।
भागवत में भी गोलोक वृन्दावन को वैकुंठों में श्रेष्ठ और भगवान का परम धाम बताया गया है, जहाँ कल्पवृक्ष और चिन्तामणि-भवन हैं। इसे भक्ति के द्वारा ही प्राप्त किया जा सकता है और वहाँ से जीव फिर संसार में नहीं लौटता।
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स्रोत: ब्रह्मवैवर्त पुराण