नरक
शब्दावली
अन्य नाम: नरकलोक, यमलोक
नरक पाप-कर्म के फल-भोग का स्थान है, जिसके अधिपति यमराज माने जाते हैं। जीव जिस प्रकार पुण्य से स्वर्ग प्राप्त करता है, उसी प्रकार पाप से नरक में दण्ड भोगता है। नरक का प्रयोजन केवल दण्ड नहीं, बल्कि पाप के फल को भोगकर उससे छुटकारा पाना है।
पुराणों में अनेक नरकों का वर्णन मिलता है और प्रत्येक पाप के अनुरूप दण्ड बताया गया है। भागवत में यमराज के दूतों और विभिन्न नरकों का विस्तृत चित्रण है, जहाँ पापी को उसके कर्म के अनुसार कष्ट भोगना पड़ता है।
नरक भी अनित्य है — दण्ड भोगने के बाद जीव पुनः योनि धारण करता है। इसीलिए शास्त्र नरक-भय से पाप-त्याग की प्रेरणा देते हैं, किन्तु अन्तिम मुक्ति का मार्ग ज्ञान, भक्ति और धर्म को बताते हैं। नरक भी संसार-चक्र का ही एक भाग है।
संबंधित
स्रोत: श्रीमद्भागवत