सुषेण
रामायण एवं रामचरितमानस
अन्य नाम: सुषेन
सुषेण वानर-सेना के वैद्य थे। लंका युद्ध में जब मेघनाद के शक्तिबाण से लक्ष्मण मूर्छित होकर भूमि पर गिर पड़े, तब राम ने सुषेण को बुलाया।
सुषेण ने लक्ष्मण की परीक्षा करके बताया कि प्राण अभी शेष हैं, और हनुमान को हिमालय पर्वत से चार महौषधियाँ — संजीवनी, विशल्यकरणी, सुवर्णकरणी और संधानी — लाने को कहा।
हनुमान औषधियाँ पहचान नहीं सके और पूरा पर्वत-शिखर उठाकर ले आए। सुषेण ने औषधि पीसकर लक्ष्मण की नासिका में डाली, जिससे वे शक्तिबाण सहित स्वस्थ होकर उठ खड़े हुए।
नाते-रिश्ते
- स्वामी: राम
- सहयोगी: हनुमान
- सहयोगी: जाम्बवान
प्रसिद्ध कथन
सुषेण ने राम से कहा — "लक्ष्मण जीवित हैं, प्राण शेष है; शीघ्र हिमालय से संजीवनी लानी होगी।" (भावानुवाद)
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स्रोत: वाल्मीकि रामायण – युद्धकाण्ड