लक्ष्मण
रामायण एवं रामचरितमानस
अन्य नाम: लखन, सौमित्र, शेषावतार, गुणमणि
लक्ष्मण दशरथ तथा सुमित्रा के पुत्र और शत्रुघ्न के सहोदर भाई थे। परंपरा में उन्हें शेषनाग का अवतार माना जाता है। वे जन्म से ही राम में अनुरक्त रहते थे और इसी कारण उन्हें 'गुणमणि' कहा गया। उनका विवाह जनक की पुत्री उर्मिला से हुआ।
वनवास में उन्होंने राम-सीता की अहर्निश सेवा की और चौदह वर्ष तक उनसे अलग नहीं रहे। अरण्यकाण्ड में उन्होंने शूर्पणखा के नाक-कान काटे और खर-दूषण तथा त्रिशिरा का वध किया। सीता-हरण के समय रावण के छल (मारीच की 'हा लक्ष्मण' पुकार) से वे विवश होकर राम के पीछे गए। लोक-प्रचलित 'लक्ष्मण-रेखा' की कथा मूल वाल्मीकि और तुलसीदास के पाठ में नहीं, अपितु परवर्ती परंपरा में मिलती है।
युद्ध में इंद्रजित (मेघनाद) की शक्ति लगने से वे मूर्छित हुए ('लक्ष्मण-मूर्छा'); फिर हनुमान संजीवनी ले आए और उनके प्राण बचे। अंत में उन्होंने ही मेघनाद का वध किया। उत्तरकाण्ड में राम के पश्चात् वे अयोध्या के उत्तराधिकारी बने।
उनका स्वभाव उग्र, सेवाभावी और राम-विरह में व्याकुल रहने वाला था; माता सुमित्रा ने ही उन्हें राम की सेवा का वर दिया था।
नाते-रिश्ते
- पिता: दशरथ
- माता: सुमित्रा
- पत्नी: उर्मिला
- भाई: राम, भरत, शत्रुघ्न
पूर्वजन्म एवं प्रारब्ध
शेषनाग का अंशावतार
प्रसिद्ध कथन
संबंधित
स्रोत: वाल्मीकि रामायण – अयोध्याकाण्ड; रामचरितमानस – लंकाकाण्ड