नल
रामायण एवं रामचरितमानस
नल वानर-सेना के शिल्पी थे और देव-शिल्पी विश्वकर्मा के पुत्र। पिता के वरदान से उन्हें विश्वकर्मा के समान शिल्पकौशल प्राप्त था।
जब राम वानर-सेना सहित समुद्र-तट पर पहुँचे, तब समुद्रदेव ने बताया कि नल विश्वकर्मा के पुत्र हैं और सेतु बना सकते हैं। नल के नेतृत्व में वानरों ने वृक्ष और शिलाएँ लाकर समुद्र पर सेतु बनाया, जिससे राम की सेना लंका पहुँची।
इस सेतु को 'नलसेतु' भी कहा जाता है। रामचरितमानस में नल और नील दोनों को सेतु का निर्माता बताया गया है, जबकि वाल्मीकि रामायण मुख्यतः नल को इसका श्रेय देता है।
नाते-रिश्ते
- पिता: विश्वकर्मा
- सहयोगी: नील
- स्वामी: राम
प्रसिद्ध कथन
नल ने राम से कहा — "समुद्र ने सत्य कहा; मैं अपने पिता के शिल्प-कौशल से इस समुद्र पर सेतु बना सकता हूँ।" (भावानुवाद)
संबंधित
स्रोत: वाल्मीकि रामायण – युद्धकाण्ड / रामचरितमानस – लंकाकाण्ड