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जांबवान

रामायण एवं रामचरितमानस

अन्य नाम: जाम्बवान, ऋक्षराज जांबवान

भालूराजचिरंजीवीरामभक्त

जांबवान ऋक्षराज (भालू-राज) थे; परंपरा में उन्हें ब्रह्मा के जम्हाई से उत्पन्न और चिरंजीवी माना जाता है। वे राम की वानर-सेना के प्रमुख सहायक थे।

समुद्र-तट पर सभी वानर निराश थे, तब जांबवान ने हनुमान को उनके दिव्य बल और पूर्व-चरित का स्मरण कराया; इससे हनुमान समुद्र लाँघ सके।

लंका-युद्ध में भी उन्होंने महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई। महाभारत में वे कुरुक्षेत्र युद्ध में उपस्थित थे और वृद्धावस्था में भी योद्धा रहे; वहाँ उन्होंने कृष्ण की महिमा सुनाई।

नाते-रिश्ते

  • पुत्री: जांबवती
  • मित्र: श्रीराम, हनुमान

प्रसिद्ध कथन

हनुमान से: "हे वायुपुत्र, तुम्हारा बल अगाध है; तुम्हें अपनी शक्ति का स्मरण करना है।" (भावानुवाद)

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श्रीरामहनुमानसुग्रीवअंगदश्रीकृष्णकुरुक्षेत्र

स्रोत: वाल्मीकि रामायण – किष्किंधाकाण्ड, युद्धकाण्ड; रामचरितमानस – सुन्दरकाण्ड