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स्मार्त सम्प्रदाय

सम्प्रदाय एवं मठ

अन्य नाम: स्मार्त धर्म, पंचदेव उपासना

पंचदेवअद्वैतस्मृतिशंकराचार्य

स्मार्त सम्प्रदाय स्मृति तथा श्रुति पर आधारित वह परंपरा है जिसमें पाँच देवताओं — गणेश, विष्णु, शिव, दुर्गा तथा सूर्य — की उपासना एक साथ की जाती है। इन्हें पंचदेव कहा जाता है। इसका मूल सिद्धांत यह है कि सभी देवता एक ही ब्रह्म के विभिन्न रूप हैं।

आदि शंकराचार्य ने अद्वैत वेदांत के आधार पर इस सम्प्रदाय को संगठित किया और चार मठों की स्थापना की। ये मठ शृंगेरी, पुरी, द्वारका तथा बद्रीनाथ में हैं। अनेक स्थानों पर पंचदेव मंदिरों में यह पद्धति आज भी प्रचलित है।

स्मार्त परंपरा में वैदिक कर्मकांड तथा अद्वैत दर्शन का समन्वय है। यह हिंदू धर्म में एकता लाने का प्रयास मानी जाती है। शंकराचार्य की परंपरा के दशनामी संन्यासी इसी से जुड़े हैं।

प्रसिद्ध कथन

एकं सद्विप्रा बहुधा वदन्ति

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वेदांतगणेशशिवविष्णुदुर्गा

स्रोत: परंपरा