बलराम
महाभारत
अन्य नाम: बलदेव, हलायुध, संकर्षण, रौहिणेय, दाऊ
बलराम वसुदेव और रोहिणी के पुत्र तथा कृष्ण के ज्येष्ठ भाई थे। कंस के अत्याचार के काल में उनका जन्म गोकुल के निकट हुआ और वे नंद-यशोदा के घर कृष्ण के साथ पले। उनका प्रमुख आयुध हल (हलायुध) था और उनका रंग गौर माना गया। उनका विवाह रेवती से हुआ।
बलराम गदा-युद्ध में अद्वितीय थे और परंपरा के अनुसार उन्होंने दुर्योधन तथा भीम दोनों को गदा-विद्या की शिक्षा दी। वे कृष्ण के साथ अनेक असुरों का वध करने में सहायक रहे। महाभारत युद्ध में उन्होंने तटस्थ रहने का निर्णय लिया, क्योंकि दोनों पक्ष उनके प्रिय थे।
युद्ध के समय वे तीर्थ-यात्रा पर चले गए और दुर्योधन तथा भीम के गदा-युद्ध के विषय में उनका क्रोध प्रसिद्ध है — दुर्योधन की जंघा पर वार को उन्होंने अधर्म कहा। यदुवंश के आपसी संहार के बाद उन्होंने समुद्र-तट पर योग द्वारा देह त्यागी। बलराम बल, सरलता और बंधु-स्नेह के प्रतीक हैं।
नाते-रिश्ते
- पिता: वसुदेव, माता: रोहिणी
- भाई: श्रीकृष्ण, बहन: सुभद्रा
- पत्नी: रेवती
- पुत्र: निशठ, उल्मुक
पूर्वजन्म एवं प्रारब्ध
पूर्वजन्म में शेषनाग (अनंत) थे; शेष के अवतार रूप में बलराम जन्मे।
प्रसिद्ध कथन
संबंधित
स्रोत: महाभारत – आदि पर्व; शल्य पर्व