शीतला माता
देवी एवं उपासना
अन्य नाम: शीतला देवी, शीतला माँ
शीतला माता आरोग्य और स्वच्छता की देवी हैं और माँ पार्वती का ही एक स्वरूप मानी जाती हैं। इनका वाहन गर्दभ (गधा) है और ये हाथों में कलश, सूप, मार्जनी (झाड़ू) तथा नीम के पत्ते धारण करती हैं। इन्हें चेचक आदि रोगों की देवी भी कहा जाता है।
इनका वर्णन स्कंद पुराण में मिलता है, जहाँ इनका वाहन गर्दभ बताया गया है और 'शीतलाष्टक' स्तोत्र प्राप्त होता है, जिसकी रचना भगवान शिव ने लोकहित में की मानी जाती है।
चैत्र मास की कृष्ण पक्ष की अष्टमी (शीतला अष्टमी या 'बसौड़ा') को इनकी विशेष पूजा होती है। इस दिन घर में चूल्हा नहीं जलता और एक दिन पहले बना बासी भोजन (बसौड़ा) इन्हें भोग लगाया जाता है। इनकी पूजा से संक्रामक रोगों से रक्षा की प्रार्थना की जाती है।
प्रसिद्ध कथन
वन्देऽहं शीतलां देवीं रासभस्थां दिगम्बराम्। मार्जनीकलशोपेतां सूर्पालंकृतमस्तकाम्॥
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स्रोत: स्कन्द पुराण