नंदा देवी
देवी एवं उपासना
अन्य नाम: नन्दा, राजराजेश्वरी, सुनंदा
नंदा देवी उत्तराखंड के गढ़वाल और कुमाऊँ क्षेत्रों की इष्टदेवी हैं। लोकमान्यता के अनुसार ये हिमालय की पुत्री और माँ पार्वती का ही रूप हैं। इन्हें राजराजेश्वरी, नंदिनी और सुनंदा आदि नामों से भी पूजा जाता है।
नंदा की उपासना के प्रमाण पुराणों में मिलते हैं; भविष्य पुराण में उल्लिखित दुर्गा के स्वरूपों में नंदा का नाम आता है। इनका मूल धाम चमोली के कुरुड़-नौटी क्षेत्र में माना जाता है।
इनके सम्मान में नंदा देवी राजजात यात्रा आयोजित होती है, जो लगभग बारह वर्ष में एक बार निकलती है और इसे 'हिमालय का महाकुंभ' कहा जाता है। यह यात्रा देवी को मायके से ससुराल (कैलाश) विदा करने की लोक-परंपरा का प्रतीक है। इसके अतिरिक्त वार्षिक 'छोटी जात' और नंदाष्टमी पर मेले भी होते हैं।
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स्रोत: लोक-परंपरा / भविष्य पुराण