शास्त्रज्ञग्रंथ, पात्र, कथाएँ, स्थान एवं शब्द — एक जगह

संतोषी माता

देवी एवं उपासना

अन्य नाम: संतोषी माँ, संतोषी देवी

लोकदेवीव्रतउत्तर भारतसंतोष

संतोषी माता संतोष और सुख-शांति की देवी हैं। लोक-परंपरा में इन्हें भगवान गणेश की पुत्री माना जाता है। ये विशेष रूप से उत्तर भारत और नेपाल की स्त्रियों द्वारा पूजी जाती हैं।

इनका वर्णन किसी प्राचीन पुराण में नहीं मिलता; ये बीसवीं शताब्दी में उत्तर भारत में फैली एक लोकदेवी हैं। इनकी उपासना शुक्रवार के व्रत, व्रत-कथा की पुस्तिकाओं और चित्रों के सहारे फैली, और 1975 की फ़िल्म 'जय संतोषी माँ' के बाद ये पूरे देश में प्रसिद्ध हुईं।

इनका प्रमुख व्रत 'सोलह शुक्रवार' का है। व्रत के दिन गुड़-चना (गुड़ और भुने चने) का भोग लगाया जाता है और खटाई (खट्टी वस्तु) का त्याग किया जाता है। मनोकामना पूर्ण होने पर आठ लड़कों को भोजन कराकर उद्यापन किया जाता है।

प्रसिद्ध कथन

ॐ श्री संतोषी महामाये गजानन्दं दायिनी। शुक्रवार प्रिये देवी नारायणी नमोऽस्तुते॥

संबंधित

गणेशलक्ष्मीदुर्गा

स्रोत: लोक-परंपरा