शांति पर्व
ग्रंथ
अन्य नाम: शांतिपर्व, शांति पर्व, द्वादश पर्व
रचयिता / कर्ता: वेदव्यास / वैशंपायन-सूत
शांति पर्व महाभारत का बारहवाँ और सबसे बड़ा पर्व है। इसमें युधिष्ठिर का राज्याभिषेक होता है।
युद्ध के पश्चात् युधिष्ठिर पश्चाताप से भरे होते हैं और भीष्म पितामह शर-शय्या पर उन्हें राजधर्म, आपद्धर्म और मोक्षधर्म का उपदेश देते हैं।
इसमें राजा के कर्तव्य, दंडनीति, शासन-व्यवस्था और मोक्ष के साधनों का विस्तृत विवेचन है। यह महाभारत का दार्शनिक दृष्टि से सर्वाधिक महत्वपूर्ण भाग है।
इसी पर्व में भीष्म अपने शरीर का त्याग करते हैं। शांति पर्व नीति, धर्म और अध्यात्म का विशाल भंडार माना जाता है।
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स्रोत: महाभारत, शांति पर्व