स्त्री पर्व
ग्रंथ
अन्य नाम: स्त्रीपर्व, स्त्री पर्व, एकादश पर्व
रचयिता / कर्ता: वेदव्यास / वैशंपायन-सूत
स्त्री पर्व महाभारत का ग्यारहवाँ पर्व है, जिसमें युद्ध में मारे गए योद्धाओं की स्त्रियों का विलाप और शोक वर्णित है।
धृतराष्ट्र, गांधारी, कुंती और द्रौपदी आदि युद्ध-भूमि में जाकर मृतकों का शोक करते हैं। इसका वर्णन अत्यंत करुण है।
इसी पर्व में गांधारी श्रीकृष्ण को शाप देती हैं कि जैसे उन्होंने कुरुवंश का नाश देखा, वैसे ही उनके यादव-कुल का भी नाश होगा।
इसमें मृत योद्धाओं का दाह-संस्कार और कुंती द्वारा कर्ण को अपने पुत्र के रूप में स्वीकार करने का प्रसंग भी है। यह पर्व युद्ध की विभीषिका का मार्मिक चित्रण है।
संबंधित
स्रोत: महाभारत, स्त्री पर्व