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रामचरितमानस (ग्रंथ)

ग्रंथ

अन्य नाम: रामचरितमानस, मानस, तुलसी रामायण

रचयिता / कर्ता: तुलसीदास

रामायणभक्तिअवधीतुलसीदास

श्रीरामचरितमानस गोस्वामी तुलसीदास द्वारा अवधी भाषा में रचित रामकथा का महाकाव्य है। इसे 'मानस' भी कहा जाता है और यह भारतीय भक्ति-साहित्य का सर्वाधिक लोकप्रिय ग्रंथ माना जाता है। इसकी रचना विक्रम संवत 1631 (सन् 1574 ई.) में अयोध्या में प्रारंभ मानी जाती है।

ग्रंथ सात कांडों में विभाजित है — बालकांड, अयोध्याकांड, अरण्यकांड, किष्किंधाकांड, सुंदरकांड, लंकाकांड और उत्तरकांड। यह वाल्मीकि रामायण पर आधारित है, पर इसमें भक्ति और श्रीराम की दिव्य लीलाओं पर विशेष बल है।

मुख्य विषय श्रीराम की मर्यादा और भक्ति, हनुमान की सेवा-निष्ठा तथा रामनाम की महिमा है। ग्रंथ में दोहा, चौपाई, सोरठा और छंदों का सुंदर प्रयोग है तथा प्रारंभ में गुरु-वंदना और श्रीराम की स्तुति है।

महात्मा: यह उत्तर भारत की रामभक्ति परंपरा का आधार ग्रंथ है। इसके सुंदरकांड और बालकांड का पाठ घरों में नित्य होता है और इसे रामचरित का सर्वश्रेष्ठ लोक-रूपांतरण माना जाता है।

प्रसिद्ध कथन

श्रीगुरु चरन सरोज रज निज मनु मुकुरु सुधारि। बरनउँ रघुबर बिमल जसु जो दायकु फल चारि॥ (मंगलाचरण, बालकांड)
मंगल भवन अमंगल हारी। द्रवहु सुदसरथ अजिर बिहारी॥ (बालकांड)

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स्रोत: श्रीरामचरितमानस, गोस्वामी तुलसीदास कृत