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तुलसीदास

रामायण एवं रामचरितमानस

अन्य नाम: गोस्वामी तुलसीदास, रामबोला

रामचरितमानसअवधीभक्तिकालरामभक्त

गोस्वामी तुलसीदास भक्तिकाल के महान कवि और 'रामचरितमानस' (अवधी में रामकथा) के रचयिता थे। उनका जन्म संवत् १५८९ (सन् १५३२ ई.) में राजापुर (वर्तमान बाँदा, उत्तर प्रदेश) में हुआ माना जाता है। बचपन में उन्हें 'रामबोला' कहा जाता था।

कथा है कि पत्नी के वियोग और उपदेश से उनका मन वैराग्य की ओर मुड़ा; वे रामभक्ति में लीन हुए। उन्होंने रामचरितमानस की रचना संवत् १६३१ में आरंभ की; 'हनुमान चालीसा', 'विनय पत्रिका', 'कवितावली', 'गीतावली', 'दोहावली' आदि उनकी अन्य रचनाएँ हैं।

मानस में उन्होंने राम-कथा को अवधी की लोकभाषा में लिखकर सामान्य जन तक पहुँचाया; भरत, लक्ष्मण, हनुमान और सीता की भक्ति को उन्होंने मार्मिक रूप दिया। वे स्वयं को हनुमान का अनुगत मानते थे।

तुलसीदास ने सगुण राम-भक्ति और 'सिय-राममय सब जग' की दृष्टि को जन-जन तक पहुँचाया; उन्हें रामभक्ति परंपरा का शिखर माना जाता है।

नाते-रिश्ते

  • आराध्य: श्रीराम
  • इष्टदेव: हनुमान
  • पत्नी: रत्नावली

प्रसिद्ध कथन

रामचरितमानस के आरंभ में: "बंदउँ गुरु पद पदुम परागा। सुरुचि सुबास सरस अनुरागा॥" (रामचरितमानस – बालकाण्ड)
भक्ति-भाव: "सिय राममय सब जग जानी। करउँ प्रनाम जोरि जुग पानी॥" (रामचरितमानस – बालकाण्ड)

संबंधित

श्रीरामहनुमानवाल्मीकिसीताकाकभुशुंडि

स्रोत: रामचरितमानस – बालकाण्ड (प्रारंभिक वंदना)