ब्रह्म पुराण
ग्रंथ
अन्य नाम: ब्रह्मपुराण, आदिपुराण
रचयिता / कर्ता: वेदव्यास
ब्रह्म पुराण अट्ठारह महापुराणों में प्रथम गिना जाता है और इसे 'आदिपुराण' भी कहा जाता है। परंपरा के अनुसार इसके रचयिता वेदव्यास हैं और इसमें लगभग दस हज़ार श्लोक माने जाते हैं।
मुख्य विषय सृष्टि की उत्पत्ति, ब्रह्मा की महिमा, मनु-वंश, सूर्य-वंश तथा चंद्र-वंश की कथाएँ और अनेक तीर्थों का माहात्म्य है। इसमें गया तथा पुरुषोत्तम-क्षेत्र (जगन्नाथ पुरी) आदि तीर्थों का वर्णन विशेष रूप से मिलता है।
इसमें श्रीकृष्ण की कथाएँ, रामकथा के कुछ अंश तथा धर्म-नीति संबंधी उपदेश भी हैं। ग्रंथ में अनेक राजवंशों की वंशावलियाँ भी दी गई हैं।
महात्मा: यह पुराण सृष्टि-विद्या और तीर्थ-माहात्म्य का प्राचीन संकलन माना जाता है और ब्रह्मा को सृष्टि के आदि-कर्ता के रूप में प्रतिष्ठित करता है।
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स्रोत: ब्रह्म पुराण