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उत्तरकांड

ग्रंथ

अन्य नाम: उत्तर कांड

रचयिता / कर्ता: वाल्मीकि

रामायणकांडवाल्मीकि

उत्तरकांड वाल्मीकि रामायण का सातवाँ और अंतिम कांड है। इसमें श्रीराम के आदर्श राज्य 'रामराज्य' का वर्णन, प्रजा-सुख, यज्ञ-अनुष्ठान तथा अनेक उपकथाएँ हैं।

मुख्य विषय — रावण के जन्म और चरित्र की कथा, हनुमान की बाल-कथा, तथा सीता के त्याग, वाल्मीकि आश्रम में लव-कुश का जन्म, अश्वमेध-यज्ञ के अवसर पर लव-कुश द्वारा रामायण-गान और अंत में सीता का पृथ्वी में प्रवेश वर्णित है।

इसके बाद श्रीराम का सरयू में जल-समाधि द्वारा परमधाम-गमन तथा भरत, शत्रुघ्न आदि का भी स्वर्गारोहण वर्णित है। इस कांड की प्रामाणिकता पर कुछ विद्वानों में मतभेद है, पर परंपरा इसे वाल्मीकि कृत मानती है।

महात्मा: यह कांड रामकथा का उपसंहार है और कर्तव्य, प्रजा-पालन तथा वैराग्य की शिक्षा देता है।

प्रसिद्ध कथन

रामो रामो राम इति प्रजानामभवन् कथाः। रामभूतं जगदभूद् रामे राज्यं प्रशासति॥ (रामराज्य-वर्णन, उत्तरकांड)

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स्रोत: वाल्मीकि रामायण, उत्तरकांड