संस्कार
शब्दावली
अन्य नाम: संस्कार, षोडश संस्कार
संस्कार का अर्थ है शुद्ध करना या गुण-अर्पण करना। हिन्दू परंपरा में जन्म से मृत्यु तक जीवन के प्रमुख अवसरों पर किए जाने वाले वैदिक कर्म संस्कार कहलाते हैं।
शास्त्रीय आधार: प्रमुख रूप से सोलह संस्कार माने जाते हैं — गर्भाधान, पुंसवन, सीमंतोन्नयन, जातकर्म, नामकरण, निष्क्रमण, अन्नप्राशन, चूड़ाकरण, कर्णवेध, विद्यारंभ, उपनयन, वेदारंभ, केशांत, समावर्तन, विवाह और अंत्येष्टि। कुछ ग्रंथों में इनकी संख्या भिन्न है।
विस्तृत अर्थ: संस्कार व्यक्ति को शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक रूप से शुद्ध करते हैं तथा समाज में उसका स्थान निर्धारित करते हैं। उपनयन को 'द्वितीय जन्म' कहा जाता है और विवाह गृहस्थ-आश्रम का प्रवेश है।
उदाहरण: नामकरण संस्कार जन्म के ग्यारहवें दिन, अन्नप्राशन छठे माह में और विवाह यज्ञ-अग्नि के समक्ष होता है।
प्रसिद्ध कथन
संबंधित
स्रोत: मनुस्मृति, याज्ञवल्क्य स्मृति, गृह्यसूत्र