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पाताल

शब्दावली

अन्य नाम: पाताल लोक, अधोलोक

लोकब्रह्माण्डपुराण

पाताल शब्द का अर्थ है पृथ्वी के नीचे का लोक। पौराणिक ब्रह्माण्ड-विज्ञान में ब्रह्मांड को तीन भागों में विभाजित किया गया है — ऊर्ध्वलोक (स्वर्ग आदि), मृत्युलोक (पृथ्वी) तथा अधोलोक (पाताल)। अधोलोक सात हैं — अतल, वितल, सुतल, तलातल, महातल, रसातल और पाताल। इनमें सातवाँ और सबसे नीचे का लोक पाताल कहलाता है।

विष्णु पुराण तथा श्रीमद्भागवत के अनुसार इन अधोलोकों में नाग, दैत्य, दानव तथा यक्ष आदि निवास करते हैं। पाताल के स्वामी नागराज वासुकि माने गए हैं और वहाँ शेषनाग (अनंत) का निवास बताया गया है, जिन पर भगवान विष्णु शयन करते हैं। पाताल में बहुमूल्य रत्न, मणि तथा औषधियाँ भी मानी गई हैं; इसीलिए पाताल जाने तथा वहाँ से पृथ्वी को लाने की गाथाएँ महाभारत तथा रामायण में मिलती हैं।

यह ध्यान रखना चाहिए कि पाताल नरक नहीं है। नरक पापियों को कर्म-फल भोगने का स्थान है, जबकि पाताल एक भौगोलिक-आध्यात्मिक लोक है जहाँ नाग आदि जातियाँ अपने राजा के अधीन रहती हैं। भगवान विष्णु के वराह अवतार ने हिरण्याक्ष का वध करके पृथ्वी को पाताल से ही ऊपर उठाया था।

प्रसिद्ध कथन

अतल, वितल, सुतल, तलातल, महातल, रसातल तथा पाताल — ये सात अधोलोक माने गए हैं। (भावानुवाद)
पाताल के अधिपति नागराज वासुकि हैं तथा शेषनाग वहीं निवास करते हैं। (भावानुवाद)

संबंधित

सप्तलोकनरकनागवासुकिशेषनागपृथ्वी

स्रोत: विष्णु पुराण