मूल नक्षत्र
नक्षत्र एवं राशि
अन्य नाम: मूला, मूल तारा
मूल नक्षत्र धनु राशि के आरंभिक भाग में स्थित है। इसके स्वामी ग्रह केतु और अधिदेवता निर्ऋति हैं। इसका प्रतीक बंधी हुई जड़ें या सिंह की पूँछ है, जो मूल और गहराई का सूचक है।
यह धनु राशि के शून्य अंश से 13 अंश 20 कलां तक फैला है और इसके चार चरण होते हैं। ज्योतिष में इसे तारा और चरण के आधार पर देखा जाता है। यह चंद्र-पथ का उन्नीसवाँ नक्षत्र है।
मूल के जातक गहन चिंतन करने वाले, दृढ़ और अनुसंधान-प्रिय होते हैं। यह नक्षत्र मूल, जड़ और गूढ़ ज्ञान का प्रतीक माना गया है। इसे गहराई तक पहुँचने का नक्षत्र कहा जाता है।
प्रसिद्ध कथन
ॐ निर्ऋतये नमः
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स्रोत: अथर्ववेद