नक्षत्र
आयुर्वेद, ज्योतिष एवं योग
अन्य नाम: नक्षत्र चक्र, जन्म नक्षत्र, तारा
नक्षत्र आकाश में स्थित तारा-समूहों को कहते हैं। ज्योतिष में राशि चक्र को सत्ताईस नक्षत्रों में विभाजित किया गया है, और प्रत्येक नक्षत्र 13 अंश 20 कला का होता है। प्रत्येक नक्षत्र के चार चरण होते हैं।
वेदांग ज्योतिष तथा बृहत् संहिता में नक्षत्रों का विस्तृत वर्णन है। प्रत्येक नक्षत्र के स्वामी ग्रह, देवता तथा स्वभाव निर्धारित हैं। जन्म के समय चंद्रमा जिस नक्षत्र में होता है, वही जन्म-नक्षत्र कहलाता है।
नक्षत्र से व्यक्ति के स्वभाव, गुण तथा जीवन-फल का आकलन किया जाता है। दशा-गणना तथा मुहूर्त-निर्णय में नक्षत्र का विशेष महत्व है। विवाह, यात्रा तथा शुभ कार्यों के लिए नक्षत्र देखा जाता है।
प्रसिद्ध कथन
सत्ताईस नक्षत्र राशि चक्र में समान रूप से विभाजित हैं और प्रत्येक के चार चरण होते हैं। (भावानुवाद)
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स्रोत: वेदांग ज्योतिष