ज्येष्ठा नक्षत्र
नक्षत्र एवं राशि
अन्य नाम: ज्येष्ठ, ज्येष्ठा तारा
ज्येष्ठा नक्षत्र वृश्चिक राशि के अंतिम भाग में स्थित है। इसके स्वामी ग्रह बुध और अधिदेवता इंद्र हैं। इसका प्रतीक कुंडल या छत्र है, जो अधिकार और रक्षा का सूचक है।
यह वृश्चिक राशि के 16 अंश 40 कलां से 30 अंश तक फैला है और इसके चार चरण होते हैं। इसे तारा और चरण के आधार पर फल देने वाला माना जाता है। यह चंद्र-पथ का अठारहवाँ नक्षत्र है।
ज्येष्ठा के जातक साहसी, महत्वाकांक्षी और नेतृत्व करने वाले होते हैं। यह नक्षत्र प्रतिष्ठा, शक्ति और रक्षा का प्रतीक माना गया है। इसे अधिकार और सम्मान का नक्षत्र कहा जाता है।
प्रसिद्ध कथन
ॐ इन्द्राय नमः
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स्रोत: सूर्य सिद्धांत