नैमिषारण्य
तीर्थ एवं स्थान
अन्य नाम: नैमिषारण्य, नैमिष क्षेत्र, मिसरिख
नैमिषारण्य उत्तर प्रदेश के सीतापुर जिले में गोमती नदी के निकट स्थित है। यह प्राचीन काल में ऋषियों का प्रमुख आरण्य-क्षेत्र था।
कथा है कि देवताओं ने दैत्यों का संहार करने के लिए एक चक्र चलाया; जहाँ उसका नेमि (धार) गिरा, वह 'नैमिषारण्य' कहलाया। यहाँ महर्षियों ने सत्र-यज्ञ किया और सूतजी (लोमहर्षण) से अठारह पुराणों का कथन सुना। इसी कारण नैमिषारण्य पुराण-परंपरा का मूल स्थल माना जाता है।
चक्रतीर्थ तथा व्यास गद्दी आदि यहाँ के प्रमुख स्थान हैं। गोमती-स्नान तथा पुराण-श्रवण की परंपरा यहाँ का महत्व है।
प्रसिद्ध कथन
'नैमिषारण्ये ऋषयः सत्रम् आसत' — नैमिषारण्य में ऋषियों ने सत्र-यज्ञ किया। (भावानुवाद, पुराण)
'चक्रनेमि-निपातेन नैमिषम्' — चक्र की धार गिरने से नैमिष नाम पड़ा। (भावानुवाद)
संबंधित
स्रोत: महाभारत (वन पर्व), वायु पुराण, विष्णु पुराण