पुराण
शब्दावली
अन्य नाम: पुराण, अठारह पुराण, महापुराण
पुराण प्राचीन कथा-ग्रंथ हैं, जिनकी रचना वेदव्यास से जुड़ी है। परंपरा में अठारह महापुराण माने जाते हैं, जिनमें सृष्टि, देव-कथाएँ, तीर्थ-माहात्म्य और वंशावलियाँ हैं।
शास्त्रीय आधार: अठारह महापुराणों में विष्णु, भागवत, शिव, स्कन्द, गरुड़, पद्म, मत्स्य, वराह, वायु और ब्रह्म आदि प्रमुख हैं। पुराणों के पाँच लक्षण माने गए हैं — सर्ग, प्रतिसर्ग, वंश, मन्वंतर और वंशानुचरित।
विस्तृत अर्थ: पुराण वेदों के ज्ञान को कथा-रूप में जनसाधारण तक पहुँचाते हैं। इनमें भक्ति, तीर्थ-महिमा, धर्म-व्यवस्था और दर्शन सरल भाषा में हैं। पुराण 'इतिहास' के साथ गिने जाते हैं।
उदाहरण: नैमिषारण्य में सूतजी ने ऋषियों को पुराण सुनाए; भागवत में कृष्ण-लीलाएँ और स्कन्द पुराण में काशी-केदार आदि तीर्थों की महिमा है।
प्रसिद्ध कथन
संबंधित
स्रोत: विष्णु पुराण, भागवत पुराण, मत्स्य पुराण