ऋषि
शब्दावली
अन्य नाम: ऋषि, मुनि, सप्तर्षि
ऋषि वे महात्मा हैं जिन्होंने तपस्या और साधना से वेद-मंत्रों का दर्शन किया। वेदों को 'अपौरुषेय' मानते हुए भी ऋषियों को उनका 'द्रष्टा' कहा जाता है।
शास्त्रीय आधार: सप्तर्षि — कश्यप, अत्रि, वसिष्ठ, विश्वामित्र, गौतम, जमदग्नि और भरद्वाज (नामों में परंपरा-भेद है)। ऋषियों के तीन वर्ग माने जाते हैं — देवर्षि, ब्रह्मर्षि और राजर्षि।
विस्तृत अर्थ: ऋषि शब्द 'ऋष' धातु से बना है, जिसका अर्थ है देखना या ज्ञान-प्राप्ति। ऋषि मंत्र-द्रष्टा, नियम-प्रणेता और आश्रम-संचालक होते थे; उनके आश्रम ज्ञान और तप के केंद्र थे।
उदाहरण: विश्वामित्र ने राम-लक्ष्मण को शस्त्र-विद्या दी; वाल्मीकि ने रामायण रची; व्यास ने वेदों का विभाजन और पुराणों की रचना की; नारद देवर्षि हैं।
प्रसिद्ध कथन
'ऋषयो मंत्रद्रष्टारः' — ऋषि मंत्रों के द्रष्टा हैं। (भावानुवाद)
'सप्तर्षीणां समूहः सप्तर्षिमण्डलम्' — सप्तर्षियों का समूह सप्तर्षिमंडल है। (भावानुवाद)
संबंधित
स्रोत: ऋग्वेद, शतपथ ब्राह्मण, पुराण