हरिद्वार
तीर्थ एवं स्थान
अन्य नाम: हरिद्वार, गंगाद्वार, मायापुरी, हरद्वार
हरिद्वार (हरद्वार) उत्तराखंड में उस स्थान पर बसा है जहाँ गंगा हिमालय से निकलकर मैदान में प्रवेश करती है, इसीलिए इसे 'गंगाद्वार' कहा जाता है। यह सप्तपुरी में एक और कुम्भ के चार स्थानों में शामिल है।
कथा है कि राजा सगर के पुत्रों को कपिल मुनि के शाप से भस्म करने के बाद भगीरथ ने कठोर तप करके गंगा को पृथ्वी पर उतारा; हरिद्वार में गंगा शिव की जटाओं से मुक्त होकर पृथ्वी पर आई। कपिल मुनि का आश्रम भी यहीं माना जाता है।
हर की पौड़ी यहाँ का प्रमुख घाट है, जहाँ प्रतिदिन शाम की गंगा आरती होती है। चैत्र मास में कुम्भ तथा प्रत्येक बारह वर्ष में कुम्भ पर्व लगता है। माया देवी और मनसा देवी मंदिर यहाँ के प्रसिद्ध तीर्थ हैं।
प्रसिद्ध कथन
'गंगाद्वारं हरिद्वारं' — गंगा का द्वार हरिद्वार है। (भावानुवाद)
'हरि-हरयोः द्वारं हरिद्वारम्' — जहाँ हरि और हर दोनों का द्वार है, वह हरिद्वार। (भावानुवाद)
संबंधित
स्रोत: वामन पुराण, स्कन्द पुराण, महाभारत (वन पर्व)