ज्येष्ठ मास
नक्षत्र एवं राशि
अन्य नाम: जेठ
ज्येष्ठ मास चांद्र-वर्ष का तीसरा मास है। इसकी पूर्णिमा ज्येष्ठा नक्षत्र में होती है, इसी से इसका नाम ज्येष्ठ पड़ा। यह ग्रीष्म ऋतु का पहला मास है और इसके अधिष्ठाता विष्णु का त्रिविक्रम स्वरूप माने जाते हैं।
नक्षत्र-आधारित नामकरण के अनुसार ज्येष्ठा नक्षत्र से इस मास का नाम बना। ग्रीष्म की तीव्रता इस मास में बढ़ने लगती है।
गंगा दशहरा और वट सावित्री व्रत इस मास के प्रमुख पर्व हैं। जल-दान, वृक्ष-रक्षा और पुण्य-कार्य के लिए यह मास महत्वपूर्ण माना जाता है।
प्रसिद्ध कथन
ज्येष्ठ मास की पूर्णिमा ज्येष्ठा नक्षत्र में होती है, इसी से इसका नाम ज्येष्ठ पड़ा (भावानुवाद)।
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स्रोत: परंपरा-प्रसिद्ध