तिथि
आयुर्वेद, ज्योतिष एवं योग
अन्य नाम: तिथि
तिथि पंचांग का प्रमुख अंग है। सूर्य तथा चंद्रमा के देशांतर में प्रत्येक बारह अंश के अंतर पर एक तिथि बनती है। एक मास में तीस तिथियाँ होती हैं — शुक्ल पक्ष की पंद्रह और कृष्ण पक्ष की पंद्रह।
बृहत् संहिता तथा अन्य ज्योतिष-ग्रंथों में तिथियों का स्वरूप तथा फल वर्णित है। प्रतिपदा से पूर्णिमा तक शुक्ल पक्ष, और प्रतिपदा से अमावस्या तक कृष्ण पक्ष माना जाता है।
तिथि का व्रत, पूजा, दान तथा शुभ कार्यों के निर्णय में विशेष स्थान है। किसी तिथि पर किया गया दान या जप विशेष फलदायी माना जाता है। मुहूर्त तथा पर्व-निर्णय तिथि पर ही आधारित होते हैं।
प्रसिद्ध कथन
सूर्य तथा चंद्र के बारह अंश के अंतर से एक तिथि बनती है और मास में तीस तिथियाँ होती हैं। (भावानुवाद)
संबंधित
स्रोत: बृहत् संहिता