मंत्र
शब्दावली
अन्य नाम: मन्त्र
मंत्र शब्द मन् (मनन करना) तथा त्रै (रक्षा करना) धातुओं से बना माना जाता है — मननात् त्रायते इति मन्त्रः, अर्थात् जिसका मनन करने से मनुष्य की रक्षा होती है, वह मंत्र है। मंत्र वेदों के मूल में हैं; ऋग्वेद के अधिकांश सूक्त देवताओं की स्तुति में रचित मंत्र ही हैं।
मंत्र मुख्यतः तीन प्रकार के होते हैं — ऋक् (स्तुति-मंत्र), यजुः (यज्ञ-विधायक मंत्र) तथा साम (गान-मंत्र)। प्रत्येक मंत्र का एक देवता, एक छंद तथा एक बीज माना जाता है। मंत्र के तीन भाग बताए जाते हैं — बीज (जैसे ॐ, ह्रीं, क्लीं), शक्ति तथा कीलक। मंत्रों का उच्चारण शुद्ध स्वर, श्रद्धा तथा विधि के अनुसार करना आवश्यक माना गया है।
मंत्र का प्रयोग पूजा, यज्ञ, जप, तंत्र-साधना तथा ध्यान में होता है। गुरु से दीक्षा लेकर मंत्र प्राप्त करना तथा उसे गुप्त रखना परंपरा है। गायत्री मंत्र, महामृत्युंजय मंत्र तथा ॐ नमः शिवाय आदि प्रसिद्ध मंत्र हैं। शास्त्रों में कहा गया है कि मंत्र की सिद्धि जप की संख्या, भक्ति तथा एकाग्रता पर निर्भर करती है।
प्रसिद्ध कथन
संबंधित
स्रोत: वेद