कालरात्रि
देवी एवं उपासना
अन्य नाम: काली रात्रि
कालरात्रि नवदुर्गा का सप्तम स्वरूप हैं। इनका वर्ण काला है, केश बिखरे रहते हैं और ये गर्दभ (गधे) पर आरूढ़ होती हैं। रूप उग्र होते हुए भी ये भक्तों के लिए शुभ और कल्याणकारी हैं; इनकी उपासना से भय और नकारात्मक शक्तियाँ नष्ट होती हैं।
इनका वर्णन नवदुर्गा परंपरा और नवदुर्गा स्तोत्र में मिलता है; नामावली में ये 'सप्तमं कालरात्रीति' कहलाती हैं।
नवरात्रि के सप्तम दिन इनकी पूजा होती है। गुड़ का भोग अर्पित किया जाता है और 'ॐ देवी कालरात्र्यै नमः' मंत्र का जप किया जाता है। इनकी उपासना भय-निवारण और रक्षा के लिए की जाती है।
प्रसिद्ध कथन
ॐ देवी कालरात्र्यै नमः॥
एकवेणी जपाकर्णपूरा नग्ना खरास्थिता। लम्बोष्ठी कर्णिकाकर्णी तैलाभ्यक्तशरीरिणी॥
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स्रोत: देवी भागवत पुराण / नवदुर्गा परंपरा