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कमंडलु

शब्दावली

अन्य नाम: कमंडलु, कमंडल, कमण्डलु

मूर्ति-शास्त्रतपस्या

कमंडलु संन्यासियों और ब्रह्मचारियों का जलपात्र है, जो प्रायः मिट्टी, लकड़ी, धातु या दरियाई नारियल आदि से बनाया जाता है। अमरकोश में इसे कुंडी आदि नामों से भी कहा गया है और यह जल धारण करने तथा आचमन के काम आता है।

कमंडलु तपस्वी स्वरूप वाले देवताओं से जुड़ा है — ब्रह्मा, शिव, दत्तात्रेय, अग्नि तथा नवरात्रि की ब्रह्मचारिणी दुर्गा इसे धारण करते हुए दिखाए जाते हैं। कुछ परंपराओं में सरस्वती और गंगा जैसी देवियों के साथ भी इसका उल्लेख मिलता है।

प्रतीक-रूप में कमंडलु त्याग, तप और अंतःशुद्धि का सूचक माना जाता है; इसमें रखा जल अमृत तथा पवित्रता से जोड़ा जाता है। मंदिरों में अभिषेक तथा शिवलिंग पर जल चढ़ाने की परंपरा में कमंडलु का प्रयोग आज भी होता है।

प्रसिद्ध कथन

कमण्डलुधराय धीमहि। (महानारायण उपनिषद)

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स्रोत: अमरकोश, शिल्प शास्त्र, परंपरा-प्रसिद्ध