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स्रुक-स्रुव

शब्दावली

अन्य नाम: स्रुक, स्रुव, स्रुच

यज्ञ-पात्रशिल्प

स्रुक (स्रुच्) और स्रुव यज्ञ में घृत अथवा आज्य की आहुति अग्नि में डालने वाले दो पात्र हैं। स्रुक बड़ी करछुल के आकार का और स्रुव छोटा चमचा होता है; दोनों को विधि-पूर्वक निश्चित काष्ठ, माप और आकार में बनाया जाता है।

ये पात्र श्रौत और स्मार्त यज्ञों की परंपरा से जुड़े हैं और वैदिक साहित्य में इनका उल्लेख मिलता है। यज्ञ-कर्म में इनके बिना आहुति संभव नहीं मानी जाती, इसीलिए इन्हें यज्ञ की सफलता के लिए आवश्यक कहा गया है।

देव-प्रतिमा शास्त्र में ब्रह्मा को प्रायः स्रुक-स्रुव धारण करते हुए दर्शाया जाता है, जो यज्ञ और सृष्टि-कर्म के उनके अधिकार का सूचक है। अग्नि तथा अन्य यज्ञ-देवताओं की प्रतिमाओं में भी इन पात्रों का प्रयोग होता है।

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स्रोत: श्रौत सूत्र, शतपथ ब्राह्मण, शिल्प शास्त्र