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कात्यायनी

देवी एवं उपासना

अन्य नाम: कात्यायनी देवी

नवदुर्गादुर्गानवरात्रिशक्ति

कात्यायनी नवदुर्गा का षष्ठ स्वरूप हैं। ये कात्यायन ऋषि के वंश में जन्म लेने से कात्यायनी कहलाईं। ये तीन नेत्रों वाली, सिंह पर आरूढ़ और चार भुजाओं में शस्त्र धारण करने वाली योद्धा देवी हैं। महिषासुर के वध से इनका गहरा संबंध है।

देवी महात्म्य में कात्यायनी-स्वरूप का महिषासुर-वध से जुड़ा वर्णन मिलता है; नवदुर्गा परंपरा में ये 'षष्ठं कात्यायनीति च' कहलाती हैं।

नवरात्रि के षष्ठ दिन इनकी पूजा होती है। शहद का भोग अर्पित किया जाता है और 'ॐ देवी कात्यायन्यै नमः' मंत्र का जप किया जाता है। इनकी उपासना अन्याय-नाश और साहस के लिए मानी जाती है।

प्रसिद्ध कथन

ॐ देवी कात्यायन्यै नमः॥
चन्द्रहासोज्ज्वलकरा शार्दूलवरवाहना। कात्यायनी शुभं दद्याद्देवी दानवघातिनी॥

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स्रोत: देवी महात्म्य / नवदुर्गा परंपरा