दुर्मुख
रामायण एवं रामचरितमानस
अन्य नाम: दुर्मुख राक्षस
दुर्मुख रावण की सेना का एक प्रमुख राक्षस योद्धा और सेनापति था। वह अपने क्रोध, दर्प और आसुरी बल के लिए जाना जाता था।
जब हनुमान ने लंका जलाई, तब दुर्मुख ने क्रुद्ध होकर रावण की सभा में कहा कि यह अपमान सहा नहीं जाएगा और वह अकेला ही वानरों को खदेड़ देगा। लंका युद्ध के प्रथम दिन वह रावण की सेना का सेनानायक था।
वाल्मीकि रामायण के युद्ध कांड में दुर्मुख का उल्लेख रावण के प्रमुख योद्धाओं में है, और लोक-परंपरा तथा रामचरितमानस में उसका वध हनुमान के हाथों माना गया है। दुर्मुख नाम का अर्थ है दुर्दांत मुख वाला।
प्रसिद्ध कथन
इदं न क्षमणीयम् हि सर्वेषां नः प्रधर्षणम्॥ (भावानुवाद: हम सबका यह अपमान सहा नहीं जा सकता।)
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स्रोत: वाल्मीकि रामायण – युद्ध कांड