द्रोण पर्व
ग्रंथ
अन्य नाम: द्रोणपर्व, द्रोण पर्व, सप्तम पर्व
रचयिता / कर्ता: वेदव्यास / वैशंपायन-सूत
द्रोण पर्व महाभारत का सातवाँ पर्व है, जिसमें द्रोणाचार्य कौरव-सेना के सेनापति होते हैं और युद्ध अपने चरम पर पहुँचता है।
इसका सबसे करुण प्रसंग अभिमन्यु का वध है, जो चक्रव्यूह तोड़कर अकेले लड़ते हुए जयद्रथ आदि के घेराव में मारा जाता है।
इसमें अर्जुन द्वारा जयद्रथ-वध का प्रण पूरा करना, घटोत्कच का युद्ध और संशप्तक-युद्ध जैसे प्रसंग हैं।
अंत में श्रीकृष्ण की युक्ति और युधिष्ठिर के 'अश्वत्थामा हत' वचन से द्रोणाचार्य का वध होता है। यह पर्व महाभारत के सबसे निर्णायक और हृदयविदारक पर्वों में से है।
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स्रोत: महाभारत, द्रोण पर्व