अभिमन्यु
महाभारत
अन्य नाम: सौभद्र, अर्जुनपुत्र, सुभद्रानंदन
अभिमन्यु अर्जुन और सुभद्रा के पुत्र तथा कृष्ण के भानजे थे। माता के गर्भ में रहते समय उन्होंने अर्जुन से चक्रव्यूह भेदन की विद्या सुनी, परंतु निकलने का उपाय सीखने से पहले ही सुभद्रा सो गईं — इसीलिए वे चक्रव्यूह में प्रवेश तो कर सके, परंतु बाहर निकलने का मार्ग उन्हें ज्ञात न था।
वे अल्पायु ही अत्यंत वीर और कुशल धनुर्धर बने। उत्तरा से उनका विवाह हुआ। कुरुक्षेत्र युद्ध के तेरहवें दिन द्रोण ने चक्रव्यूह की रचना की और अभिमन्यु अकेले उसमें घुसे, क्योंकि जयद्रथ ने अन्य पांडवों को रोक दिया। अभिमन्यु ने अकेले द्रोण, दुर्योधन, कर्ण, दुःशासन आदि अनेक महारथियों से लड़कर उन्हें परास्त किया।
अंत में द्रोण के आदेश पर कौरवों ने उस पर एक साथ छह महारथियों के साथ मिलकर आक्रमण किया, जो युद्ध-धर्म के विरुद्ध था; कर्ण ने उसका धनुष काटा और दुःशासन की भुजाओं तथा दुर्योधन के बाणों से वह वीरगति को प्राप्त हुआ। अभिमन्यु की मृत्यु ने अर्जुन के प्रतिशोध और जयद्रथ-वध की प्रतिज्ञा को जन्म दिया। उसकी पत्नी उत्तरा के गर्भ से परीक्षित का जन्म हुआ।
नाते-रिश्ते
- पिता: अर्जुन, माता: सुभद्रा
- पत्नी: उत्तरा
- पुत्र: परीक्षित
- मामा: श्रीकृष्ण
पूर्वजन्म एवं प्रारब्ध
पूर्वजन्म में चंद्रपुत्र वर्चा थे; चंद्रदेव की शर्त पर अल्पायु अभिमन्यु रूप में जन्मे।
प्रसिद्ध कथन
संबंधित
स्रोत: महाभारत – द्रोण पर्व