कर्ण पर्व
ग्रंथ
अन्य नाम: कर्णपर्व, कर्ण पर्व, अष्टम पर्व
रचयिता / कर्ता: वेदव्यास / वैशंपायन-सूत
कर्ण पर्व महाभारत का आठवाँ पर्व है, जिसमें कर्ण कौरव-सेना के सेनापति बनते हैं।
इसमें कर्ण और अर्जुन के बीच अंतिम महायुद्ध होता है। कर्ण के सारथी शल्य बनते हैं और उनके शाप तथा परशुराम का दिया अस्त्र-ज्ञान उनके पतन में भूमिका निभाते हैं।
इस पर्व में कुंती-कर्ण रहस्य, कर्ण का दानवीर स्वभाव और उनकी मृत्यु से पूर्व की परिस्थितियाँ गहराई से चित्रित हैं।
अंत में अर्जुन कर्ण का वध करते हैं, जिससे कौरव-सेना का प्रमुख आधार टूट जाता है। यह पर्व महाभारत के सबसे त्रासद पात्र कर्ण की कथा का समापन है।
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स्रोत: महाभारत, कर्ण पर्व