दशरथ
रामायण एवं रामचरितमानस
अन्य नाम: दशरथ, रघुकुल नृप
दशरथ इक्ष्वाकु-कुल (सूर्यवंश/रघुवंश) के राजा तथा अयोध्या के शासक थे। उनकी तीन रानियाँ थीं — कौशल्या, कैकेयी और सुमित्रा। संतान-हीन होने पर उन्होंने ऋष्यशृंग के नेतृत्व में पुत्रकामेष्टि यज्ञ कराया, जिससे चार पुत्र उत्पन्न हुए।
युवावस्था में शिकार करते समय उन्होंने अंधे माता-पिता के एकमात्र पुत्र श्रवण कुमार को भूलवश बाण मारा; मरते हुए श्रवण के माता-पिता ने उन्हें 'पुत्र-शोक में मृत्यु' का शाप दिया। इसी शाप के कारण राम के वन जाने पर वे विरह में प्राण त्यागते हैं।
देवासुर संग्राम में कैकेयी ने उनके प्राण बचाए थे, जिसके बदले उन्होंने उसे दो वरदान दिए — यही वरदान आगे भरत के राज्याभिषेक और राम के वनवास का कारण बना। राम को अपना उत्तराधिकारी घोषित करते समय उन्होंने भरत को राज्य देने का निश्चय किया था।
वे प्रजावत्सल और वचन-निष्ठ राजा थे; पुत्र-प्रेम और शाप-विवशता उनके चरित्र की करुण पहचान है।
नाते-रिश्ते
- पत्नी: कौशल्या, कैकेयी, सुमित्रा
- पुत्र: राम, भरत, लक्ष्मण, शत्रुघ्न
पूर्वजन्म एवं प्रारब्ध
श्रवण-वध के शाप का प्रारब्ध (पुत्र-वियोग)
प्रसिद्ध कथन
संबंधित
स्रोत: वाल्मीकि रामायण – अयोध्याकाण्ड; रामचरितमानस – अयोध्याकाण्ड