कौशल्या
रामायण एवं रामचरितमानस
अन्य नाम: कौसल्या
कौशल्या राजा दशरथ की ज्येष्ठ रानी और कोसल देश के राजा की पुत्री थीं। वे श्रीराम की माता थीं और अयोध्या की पटरानी रहीं।
राम के जन्म से उनका जीवन धन्य हुआ; वनवास के समय वे अत्यंत विरहिणी हुईं, परंतु धैर्य से पति और प्रजा को सँभाला। राम की आज्ञा के अनुसार उन्होंने भरत को मातृ-वात्सल्य दिया।
राम-राज्याभिषेक के समय वे राजमाता बनीं; तुलसीदास ने उन्हें सरल, वात्सल्यपूर्ण और शांत स्वभाव की माता के रूप में चित्रित किया है।
नाते-रिश्ते
- पति: दशरथ
- पुत्र: श्रीराम
प्रसिद्ध कथन
राम को वन जाते देख: "हे पुत्र, धर्म और पिता का वचन शिरोधार्य कर; माता तुम्हारी राह देखेगी।" (भावानुवाद)
संबंधित
स्रोत: वाल्मीकि रामायण – अयोध्याकाण्ड; रामचरितमानस – अयोध्याकाण्ड