गरुड़
रामायण एवं रामचरितमानस
अन्य नाम: गरुड, वैनतेय, खगराज, पन्नगारि
गरुड़ पक्षियों के राजा, माता विनता और ऋषि कश्यप के पुत्र तथा अरुण के भाई हैं; वे विष्णु के वाहन और 'वैनतेय' कहलाते हैं। वे नागों के शत्रु ('पन्नगारि') हैं; जटायु और संपाति उनके भतीजे थे।
परंपरा में उन्हें 'अमृत-आनयन' (समुद्र-मंथन में अमृत लाना) और अपनी माता को दासी-बंधन से मुक्त कराने का श्रेय है।
रामचरितमानस के उत्तरकाण्ड में गरुड़ राम-महिमा पर अनेक प्रश्न करते हैं और काकभुशुंडि उनके उत्तर में भक्ति-तत्त्व तथा राम-चरित का विस्तार से वर्णन करते हैं। इसी संवाद से मानस का उपदेश-अंश पूर्ण होता है।
नाते-रिश्ते
- पिता: कश्यप
- माता: विनता
- भाई: अरुण
- स्वामी: विष्णु
- शत्रु: नाग
प्रसिद्ध कथन
काकभुशुंडि से: "हे मुनि, मुझे भगवान की कथा और भक्ति का तत्त्व बताइए।" (भावानुवाद)
संबंधित
स्रोत: रामचरितमानस – उत्तरकाण्ड (काकभुशुंडि संवाद)