सत्यवती
महाभारत
अन्य नाम: मत्स्यगंधा, योजनगंधा, काली, दाशराजकन्या
सत्यवती दाशराज की पुत्री थीं और मछुआरे के घर पली थीं। उनके शरीर से मछली की गंध आती थी, इसीलिए वे ‘मत्स्यगंधा’ कहलाईं; पराशर ऋषि के वर से उनका नाम ‘योजनगंधा’ हुआ। पराशर से उनके पुत्र वेदव्यास का जन्म हुआ, जो बाद में वेदों के विभाजक और महाभारत के रचयिता बने।
राजा शांतनु उनसे विवाह करना चाहते थे, परंतु उनके पिता ने शर्त रखी कि सत्यवती के पुत्र ही राज्य के उत्तराधिकारी होंगे। भीष्म ने राज्य-त्याग और ब्रह्मचर्य की प्रतिज्ञा करके यह विवाह संभव किया। सत्यवती से चित्रांगद और विचित्रवीर्य उत्पन्न हुए।
दोनों पुत्रों की अकाल मृत्यु के बाद कुरुवंश की रक्षा के लिए उन्होंने नियोग-प्रथा के अंतर्गत वेदव्यास को आह्वान किया, जिससे अंबिका से धृतराष्ट्र, अंबालिका से पांडु और दासी परीक्षित्रा से विदुर का जन्म हुआ। इस प्रकार सत्यवती कुरुवंश की वृद्धि का आधार बनीं।
नाते-रिश्ते
- पिता: उपरिचर वसु (पालक: दाशराज)
- पति: शांतनु
- पुत्र: वेदव्यास, विचित्रवीर्य, चित्रांगद
- पुत्रवधू: अंबिका, अंबालिका
पूर्वजन्म एवं प्रारब्ध
पूर्वजन्म में अच्छोदा (पितृकन्या) थीं; मत्स्य-गंध वाली सत्यवती रूप में जन्मीं।
प्रसिद्ध कथन
संबंधित
स्रोत: महाभारत – आदि पर्व