पांडु
महाभारत
अन्य नाम: पाण्डु, विचित्रवीर्यपुत्र, कुरुराज
पांडु वेदव्यास और अंबालिका के पुत्र तथा धृतराष्ट्र के भाई थे। वे अत्यंत रूपवान, वीर और धनुर्धर थे, इसीलिए उन्हें राज्य मिला। उन्होंने कुंती और माद्री से विवाह किया। आखेट में उन्होंने मृग-रूप में संयोगरत एक ऋषि को मार दिया, जिससे क्रुद्ध ऋषि ने उन्हें शाप दिया कि जब वे अपनी पत्नी के साथ संयोग करेंगे तभी उनकी मृत्यु होगी।
इस शाप के कारण पांडु संतान-सुख से वंचित रह गए। तब कुंती ने दुर्वासा ऋषि से प्राप्त मंत्र के प्रभाव से इंद्र आदि देवताओं को आह्वान किया और युधिष्ठिर, भीम तथा अर्जुन का जन्म हुआ। माद्री ने अश्विनीकुमारों से नकुल और सहदेव को जन्म दिया।
अंततः एक दिन माद्री के साथ संयोग के समय शाप के कारण पांडु की मृत्यु हो गई। माद्री ने उनके साथ सती होना चाहा और अग्नि में प्रवेश कर गईं, जबकि कुंती ने पाँचों बालकों का पालन करने का भार लिया। पांडु करुण और वीर दोनों रूपों में महाभारत की पूर्व-कथा का केंद्रीय पात्र हैं।
नाते-रिश्ते
- पिता: वेदव्यास, माता: अंबालिका
- पत्नी: कुंती, माद्री
- पुत्र: पाँच पांडव
- भाई: धृतराष्ट्र, विदुर
पूर्वजन्म एवं प्रारब्ध
पूर्वजन्म में पवित्रता के देवता थे; पांडु रूप में जन्मे।
प्रसिद्ध कथन
संबंधित
स्रोत: महाभारत – आदि पर्व