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वैशेषिक सूत्र

ग्रंथ

अन्य नाम: वैशेषिक दर्शन, वैशेषिकसूत्र, कणाद सूत्र

रचयिता / कर्ता: कणाद

दर्शनसूत्रवैशेषिकपरमाणु

वैशेषिक सूत्र वैशेषिक दर्शन का मूल ग्रंथ है, जिसके रचयिता कणाद (कणभक्ष) माने जाते हैं। ग्रंथ दस अध्यायों में विभाजित है।

मुख्य विषय सृष्टि और पदार्थों का विश्लेषण है। इसमें छह पदार्थ — द्रव्य, गुण, कर्म, सामान्य, विशेष और समवाय — का प्रतिपादन है। द्रव्य के नौ भेद — पृथ्वी, जल, तेज, वायु, आकाश, काल, दिक्, आत्मा और मन — बताए गए हैं।

इस दर्शन की विशेषता परमाणु-सिद्धांत है — सृष्टि अत्यंत सूक्ष्म और अविभाज्य परमाणुओं से बनी मानी जाती है। इसमें धर्म का लक्षण यज्ञ-प्रेरक बताया गया है।

महात्मा: भारतीय परमाणु-वाद और तत्त्व-विज्ञान का यह मूल स्रोत है; न्याय दर्शन के साथ इसका निकट संबंध है।

प्रसिद्ध कथन

अथातो धर्मं व्याख्यास्यामः॥ (१.१.१)

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षड्दर्शनन्यायआत्माधर्म

स्रोत: वैशेषिक सूत्र