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सांख्यकारिका

ग्रंथ

अन्य नाम: सांख्य कारिका, सांख्यकारिका

रचयिता / कर्ता: ईश्वरकृष्ण

दर्शनसांख्यतत्त्वप्रकृति

सांख्यकारिका सांख्य दर्शन का प्रमुख और प्राचीनतम उपलब्ध मूल ग्रंथ है, जिसके रचयिता ईश्वरकृष्ण माने जाते हैं। यह 72 कारिकाओं (आर्याछंद) में रचित है।

मुख्य विषय दुःख से मुक्ति और तत्त्व-ज्ञान है। सांख्य दर्शन में 25 तत्त्व माने गए हैं — प्रकृति, महत् (बुद्धि), अहंकार, मन, पाँच ज्ञानेंद्रियाँ, पाँच कर्मेंद्रियाँ, पाँच तन्मात्राएँ, पाँच महाभूत और पुरुष।

इस दर्शन में प्रकृति और पुरुष को दो स्वतंत्र सिद्धांत माना गया है। प्रकृति जड़ पर सक्रिय है और पुरुष चेतन पर निष्क्रिय; दोनों के संयोग से सृष्टि-प्रक्रिया चलती है। दुःख-निवृत्ति के लिए प्रकृति-पुरुष विवेक आवश्यक है।

महात्मा: योग दर्शन का सैद्धांतिक आधार सांख्य है; इसीलिए दोनों को 'सांख्य-योग' कहा जाता है। भारतीय तत्त्व-चिंतन में इसका मूलभूत स्थान है।

प्रसिद्ध कथन

दुःखत्रयाभिघाताज्जिज्ञासा तदपघातके हेतौ। दृष्टे सापार्था चेन्नैकान्तात्यन्ततोऽभावात्॥ (कारिका १)

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स्रोत: सांख्यकारिका